Mantra 22259

7 वर्ष के अंतराल पर देखा जाए तो सभी व्यक्ति अपने कुल, सामाजिक वातावरण, और ग्रह-नक्षत्रों से मिले गुण के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर या तो स्थिर है या बढ़ रहे हैं, परंतु कुछ हैं जिनका प्राकृतिक स्वभाव ही घटना हैं। धन्यवाद श्री कृष्ण, धन्यवाद श्री अर्जुन।   In 7 years’, … Continue reading Mantra 22259

Mantra 22284

जिस प्रकार प्रजा के लिये उसका राजा पिता समान होता हैं क्योंकि उन्होंने राजा के उद्देश्य को स्वेछा से स्वीकार किया हैं, उसी प्रकार मेरे उद्देश्य (देश का अतुलनीय ऐश्वर्य और भारत का अनंत विस्तार) को स्वेछा से स्वीकार करने वालों के लिये मैं, जो ॐ में निवास करता हैं, पिता समान हूँ और वे … Continue reading Mantra 22284

Mantra 22287

कर्मफल तो सबको प्राप्त होते हैं फिर चाहे वो आप हो या मैं। मेरे लिये तो 7 वर्ष का कठोर कारावास सुनिश्चित हैं जहाँ मेरे हृदय को नुकीले तीरों से विदीर्ण किया जायेगा और मेरे दिमाग को आग के भट्टे में तपाया जायेगा। अब सवाल बचता हैं क्या और कैसे? जो भी हो, देश का … Continue reading Mantra 22287

Mantra 22289

देश के अतुलनीय ऐश्वर्य के लिये देशवासियों को धैर्यपूर्वक सत्य वचन कहते और ॐ का जाप करते समय में भ्रमण करने का पूरा अधिकार हैं। धन्यवाद श्री कृष्ण, धन्यवाद श्री अर्जुन।   For the incomparable opulence of the nation, people of nation have rights to time travel patiently while speaking truth and chanting ॐ. Thank you, … Continue reading Mantra 22289

Mantra 22291

देशवासियों के शिक्षा, रोजगार, स्वस्थ, निर्माण, और विस्तार के लिये पुराने देश के मार्गदर्शन में नए देशों के समृद्धि और सामर्थ्य का विकास हो रहा हैं। धन्यवाद श्री कृष्ण, धन्यवाद श्री अर्जुन।   For the education, employment, health, evolution, and expansion of people of nation, new nations are developing their prosperity and capabilities under the … Continue reading Mantra 22291

Mantra 22347

परमसत्य बस एक नाम हैं जो उस अनंत सत्य का नाम रखने के उद्देश्य से रक्खा गया हैं जिसका कोई नाम नहीं हैं और जिसे सिर्फ ध्यान के द्वारा हृदय में महसूस किया जा सकता हैं। Paramsatya is just a name kept for the shake of representing that infinite truth which cannot be named and … Continue reading Mantra 22347

Mantra 22348

 हमें अपना जीवन उद्देश्य पाता हो या ना पता हो लेकिन प्रतिदिन हमें हमारे द्वारा हमारे जीवन उद्देश्य को पूरा करने के लिये परमसत्य को आभार व्यक्त करना चाहिये। Whether we know our live purpose or not but we have to be grateful to Paramsatya in advance for fulfilling our life purpose through us.

Mantra 22352

 हमारे कार्यों का महत्व समय से परे होना चाहिये, अर्थात हमारा कार्य भूत, वर्तमान, और भविष्य तीनों ही कालों में समान प्रासंगिकता रखे तभी हम संतोष पूर्वक परमसत्य को प्राप्त कर सकते हैं। The importance of our work must remain beyond the limitation of time, it means our work must be relevant in past, present, … Continue reading Mantra 22352